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नोटा सेना
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एस सी/ एस टी एटरोसिटी एक्ट हटाओ, नहीं तो नोटा पाओ


पिछले वर्ष माननीय सुप्रीम कोर्ट ने एस सी/ एस टी एटरोसिटी एक्ट पर एतिहासिक निर्णय देते हुए एस सी/ एस टी एटरोसिटी एक्ट में बिना जांच के गिरफ्तारी पर रोक लगाकर न्यायसंगत नियम बनाए थे। जिसके विरोध में कई अनुसूचित जाति के नेता खड़े हो गए और भारत बंद भी किया। इस भारत बंद के दबाव और अनुसूचित जाति की तुष्टीकरण नीति के अंतर्गत मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को पलटने के लिए संसद में एस सी/ एस टी संशोधन कानून प्रस्तुत कर उसे पास कराया।
साधारण श्रेणी के नागरिक होते हुए हम अनुसूचित जाति के नागरिकों का अत्यंत सम्मान करते है। कुछ गिनी चुनी घटनाएँ हो सकती हैं जिनमे समाज में किसी जाति के लोगों के साथ शोषण हो, तो उन शोषणकर्ताओं के विरुद्ध कठोर कार्यवाही होनी चाहिए। किन्तु गिने चुने लोगों के कारण समूचे समाज को दोषी नहीं बनाया जा सकता और ऐसा कानून भी नहीं बनाया जा सकता जिसका दुरुपयोग हो सके। 

पिछले वर्ष मध्यप्रदेश में एक डाक्टर शिवम मिश्रा ने एस सी/ एस टी एटरोसिटी एक्ट के अंतर्गत हुई कार्यवाही से भय खाते हुए आत्महत्या कर ली थी। अगर कोई भी कार्यवाही करने से पहले जांच होती ये शिवम मिश्रा कभी आत्महत्या नहीं करते।

आखिर क्यूँ रोहित वेमुला की आत्महत्या से देश की राजनीति हिल जाति है और सामान्य जाति के डाक्टर नागरिक की आत्महत्या का समाचार मात्र समाचार पत्र के कोने में पड़ा रह जाता है?
अनुसूचित जाति के लोग भारत के अभिन्न अंग हैं और उन्हे सभी प्रकार की उन्नति के अवसर मिलने चाहिए। किन्तु अनुसूचित जाति के लोगों की भावनाओं का दुरुपयोग करके कई राजनैतिक दलों के नेता अपनी राजनीति चलाते हैं, ये अनुचित है। जैसे भाजपा अन्य दलों पर अल्पसंख्यक तुष्टीकरण का आरोप लगाती रही है, अब स्वयं अनुसूचित जाति के लोगों का तुष्टीकरण कर रही है।

इस लिए समूचे जनजन का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 20 मार्च 2018 को दिये निर्णय को मान्य किया जाए जिससे कम से कम आरोपी के विरुद्ध किसी भी कार्यवाही से पहले जांच तो हो। और अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो सामान्य श्रेणी के करोड़ों लोग 2019 के चुनावों में ईवीएम में NOTA  का बटन दबाएँगे और सभी पार्टियों को निरस्त करेंगे। करोड़ों लोगों के NOTA सभी राजनैतिक दलों को विवश कर देंगे कि वे सुप्रीम कोर्ट द्वारा 20 मार्च 2018 को दिये निर्णय को मान्य करें और किसी भी नागरिक के साथ अन्याय न हो।
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जय नोटा सेना। 

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